कौशल विकास प्रशिक्षण नीति, 2026
नेशनल शेडयूल्ड कास्ट्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसएफडीसी)
1. पृष्ठभूमि
1.1 एनएसएफडीसी के मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन [खंड-III(A)(2)] में वर्णित मुख्य उद्देश्यों के अनुसार, एनएसएफडीसी का अधिदेश अन्य बातों के साथ-साथ यह है कि “अनुसूचित जातियों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कौशल और प्रक्रियाओं को उन्नत करना, उत्पादन, प्रशिक्षण, गुणवत्ता नियंत्रण, प्रक्रिया विकास, प्रौद्योगिकी और सामान्य सुविधा केंद्र या इकाइयाें की स्थापना, संचालन और प्रबंधन करना और इस उद्देश्य के लिए अन्य एजेंसियों, फर्मों और उद्यमों के साथ सहयोग या सांझेदारी करना” है।
1.2
1.3
1.4 उक्त सामान्य मानदंडों को एनएसएफडीसी कौशल विकास प्रशिक्षण नीति 2026 में शामिल किया गया है, और यह नीति कौशल विकास प्रशिक्षण नीति, 2016 का स्थान लेगी।
2. लक्ष्य और उद्देश्य
2.1 अनुसूचित जाति समुदाय के व्यक्तियों की कौशल संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु एक परिणाम-आधारित एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना और रोजगार के माध्यम से उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार करना। इसके अलावा, योग्यता आधारित ढांचे - राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (एनएसक्यूएफ) को अपनाकर कौशल विकास कार्यक्रमों की गुणवत्ता में निरंतर सुधार के लिए उपाय किए जाएंगे।
2.2 लाभ अर्जित करने वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई), परोपकारी संगठनों और अन्य संगठनों से उनके कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) निधि और/या किसी अन्य निधि से कौशल प्रशिक्षण के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाना।
3. पात्रता
3.1 आवेदक अनुसूचित जाति समुदाय से होना चाहिए। इसके लिए कोई वार्षिक पारिवारिक आय का कोई मानदंड नहीं है।
3.2 चयन की तिथि पर उम्मीदवार की आयु 18 से 45 वर्ष के बीच होनी चाहिए।
4. कौशल विकास के लिए नीतिगत रूपरेखा
यह रूपरेखा उद्देश्यों को प्राप्ति के लिए मानकों और सक्षमकारी तंत्रों की रूपरेखा तैयार करता है।
4.1 गुणवत्ता
कौशल विकास प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और राष्ट्रीय मानकों को पूरा करने के लिए एनएसएफडीसी द्वारा निम्नलिखित मापदंड अपनाए जाएंगे:
4.1.1 सामान्य मानदंडों को अपनाना
एनएसएफडीसी कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए संसाधनों की उपलब्धता और कौशल विकास योजनाओं के मानदंडों की प्रयोज्यता के अधीन, भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित कौशल विकास योजनाओं के लिए सामान्य मानदंडों के प्रमुख प्रावधानों को अपनाएगा।
4.1.2 NSQF को अपनाना
सभी पाठ्यक्रम/प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (एनएसक्यूएफ) के अनुरूप और रोजगार उन्मुख होंगे, जब तक कि सरकार द्वारा जारी उचित निर्देशों के अंतर्गत कुछ पाठ्यक्रमों जैसे (एमएसएमई पाठ्यक्रमों) को छूट प्रदान न की गई हो।
4.1.3 पाठ्यक्रम / कोर्सेस
यह सुनिश्चित करने के लिए कि पाठ्यक्रम उभरती बाजार आवश्यकताओं के अनुरूप हों और विभिन्न नौकरी भूमिकाओं के लिए नवीनतम राष्ट्रीय व्यावसायिक मानकों (NOS) और योग्यता पैक (QPs) से संबद्ध हों, एनएसएफडीसी भारत सरकार और सेक्टर स्किल काउंसिल (SSCs) द्वारा अनुमोदित पाठ्यक्रमों/कोर्सेस को लागू करेगा।
4.1.4 कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों का परिणाम
कौशल प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य प्रशिक्षुओं को रोजगार उपलब्ध कराना है, चाहे वह स्वरोजगार हो या वेतन-रोजगार। कौशल प्रशिक्षण की प्रभावशीलता के मूल्यांकन के लिए, इस परिणाम की वस्तुनिष्ट रूप से निगरानी की जाएगी होगी। एनएसएफडीसी, सामान्य मानदंडों द्वारा निर्धारित प्लेसमेंट मानदंडों का पालन करेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद, प्रशिक्षुओं की न्यूनतम छह महीने की अवधि की ट्रैकिंग की जाएगी।
4.2 प्रशिक्षण संस्थानों/प्रदाताओं का चयन
प्रायोजित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन के लिए प्रशिक्षण संस्थानों का चयन सरकारी / अर्ध-सरकारी / स्वायत्त संस्थानों और विश्वविद्यालयों/डीम्ड विश्वविद्यालयों में से किया जाएगा।
4.3 सहायता की मात्रा
कौशल विकास प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत, एनएसएफडीसी प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संपूर्ण परिचालन व्यय को वहन करने के लिए अनुदान के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करेगा।
- गैर-आवासीय प्रशिक्षण: प्रशिक्षण कार्यक्रम की अवधि के दौरान उम्मीदवारों को उनके आकस्मिक खर्चों को पूरा करने के लिए प्रतिमाह ₹1,500 वजीफा (स्टाइपेंड) प्रदान किया जाएगा, जो समग्रत: 80% उपस्थिति के अधीन होगा। इसका भुगतान प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से किया जाएगा।
- आवासीय प्रशिक्षण: प्रशिक्षण संस्थानों की प्रशिक्षण लागत में आवास और भोजन लागत (रहने और खाने का खर्च) शामिल की जाएगी।
इसके अलावा, यदि कोई ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग है, तो प्रशिक्षण संस्थानों को प्रति उम्मीदवार लागू बेस आवर लागत का 50% भुगतान किया जाएगा।
4.4 प्रशिक्षण कार्यक्रम/नौकरी की भूमिकाएं
रोजगार उन्मुख राष्ट्रीय कौशल योग्यता रूपरेखा (NSQF) के अनुरूप नौकरी की भूमिकाओं या रोजगार की संभावना वाले पाठ्यक्रमों और किसी भी उपयुक्त सरकारी निर्देशों द्वारा (एनएसक्यूएफ) से छूट प्राप्त पाठ्यक्रमों को एनएसएफडीसी द्वारा प्रायोजित करने के लिए विचार किया जाएगा। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम द्वारा किए गए कौशल अंतर विश्लेषण को भी चयन में ध्यान में रखा जाएगा।
4.5 प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अवधि
कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अवधि कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई), भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी एनएसक्यूएफ/राष्ट्रीय व्यवसाय मानकों (NOS) के अनुसार होगी।
4.6 प्रशिक्षण कार्यक्रमों की स्वीकृति
प्रत्येक वर्ष, उपलब्ध धन/वार्षिक लक्ष्यों के आधार पर, चयनित प्रशिक्षण संस्थानों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे। प्रस्तावों की जांच एक परियोजना मूल्यांकन समिति (पीएसी) करेगी और सिफारिशें करेगी। सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद, प्रशिक्षुओं, स्थान, अवधि और लागत का विवरण देने वाले वित्तीय स्वीकृति पत्र जारी किए जाएंगे।
4.7 निधियों को निर्मुक्त करना
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय द्वारा जारी सामान्य मानदंडों के अनुसार प्रशिक्षण संस्थानों को चरणबद्ध (माइल-स्टोन) के आधार पर निधियों को निर्मुक्त किया जाएगा।
4.8 चैनलाइजिंग एजेंसियां
एनएसएफडीसी की चैनलाइजिंग एजेंसियां (CAs) प्रशिक्षुओं के उचित चयन में महत्वपूर्ण और प्रभावी भूमिका निभाती रहेंगी। प्रशिक्षण के बाद, चैनलाइजिंग एजेंसियां प्रशिक्षुओं को सूक्ष्म उद्यम स्तर के स्टार्ट-अप स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने में भी सहयोग प्रदान कर सकती है।
4.9 महिलाओं के कौशल को प्रोत्साहन
एनएसएफडीसी लक्षित समूह के लिए अपने प्रायोजित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 40% महिला उम्मीदवारों को शामिल करने का प्रयास करेगा।
5. कार्यान्वयन के लिए निधियां
एनएसएफडीसी रोजगार उन्मुख कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रायोजित करने के लिए अपने स्वयं के स्रोतों से निधियां जुटाएगा। इसके लिए पिछले वित्तीय वर्ष की व्यय से अधिक आय का 10% निर्धारित किया जाएगा।
6. कार्यक्रमों की निगरानी
प्रशिक्षण कार्यक्रमों की समवर्ती निगरानी एनएसएफडीसी के कर्मचारियों/अधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण केंद्रों के स्थल का निरीक्षण कर/या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करके की जाएगी।
7. मूल्यांकन
कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों की प्रासंगिकता, परिणामों तथा लाभाविंत उम्मीदवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर इसके प्रभाव का आंकलन करने के लिए प्रत्येक वर्ष नमूना आधार पर तृतीय पक्ष मूल्यांकन अध्ययन कराए जाएंगे।