एनएसएफडीसी का पूर्ण रूप 'नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरर्पोशन' है।
नेशनल शेड्यूल्ड कास्ट्स फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरर्पोशन (एनएसएफडीसी) का पंजीकृत मुख्यालय 14वीं मंजिल, स्कोप मीनार, कोर 1 और 2, उत्तरी टावर, लक्ष्मी नगर डिस्ट्रिक्ट सेंटर, लक्ष्मी नगर, दिल्ली - 110092 में स्थित है। इसके अतिरिक्त, क्षेत्रीय संचालन और पहुंच को सुविधाजनक बनाने के लिए, निगम मुंबई, कोलकाता, लखनऊ और बेंगलुरु शहरों में रणनीतिक रूप से स्थित संपर्क केंद्र (Liaison Centers) भी संचालित करता है।
एनएसएफडीसी क्रेडिट योजनाओं के तहत ऋण प्राप्त करने के लिए, आवेदक को दो आवश्यक मानदंडों को पूरा करना होगा: समुदाय की आवश्यकता: आवेदक अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से संबंधित होना चाहिए और उसके पास सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया वैध जाति प्रमाण पत्र होना चाहिए। आय सीमा: सभी स्रोतों से वार्षिक पारिवारिक आय ₹5.00 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए (ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लिए लागू, 7 जनवरी, 2026 से प्रभावी)। (नोट: यह आय सीमा केवल ऋणों पर लागू होती है। एनएसएफडीसी द्वारा प्रायोजित कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों में नामांकन के लिए कोई आय सीमा नहीं है)।
नहीं। एनएसएफडीसी द्वारा आवेदकों/लाभार्थियों से सीधे संपर्क या पत्राचार पर विचार नहीं किया जाता है। सभी ऋण आवेदन अधिकृत राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों (SCAs) या अन्य चैनलाइजिंग एजेंसियों (CAs) के माध्यम से भेजे जाने चाहिए। आप निम्नलिखित में से किसी भी मोड के माध्यम से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं:
- ऑनलाइन मोड (PM-SURAJ पोर्टल): सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ऋण आवेदनों के सुव्यवस्थित तरीके से जमा करने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म प्रदान करता है। आप आधिकारिक PM-SURAJ पोर्टल pmsuraj.dosje.gov.in पर जाकर आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
- ऑफ़लाइन मोड (चैनलाइजिंग एजेंसियां): आप राज्य चैनलाइजिंग एजेंसी/चैनलाइजिंग एजेंसी के निकटतम जिला शाखा कार्यालय या प्रधान कार्यालय में भौतिक रूप से आवेदन जमा कर सकते हैं। ऑफ़लाइन आवेदन करते समय, सुनिश्चित करें कि आप अपने आवेदन के साथ वैध जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण, केवईसी (KYC) दस्तावेज और संबंधित एजेंसी की विशिष्ट चेकलिस्ट के अनुसार आवश्यक अन्य दस्तावेज जमा करें।
हाँ, शिक्षा ऋण योजना (ELS) के माध्यम से एनएसएफडीसी पात्र छात्रों को भारत या विदेश में मान्यता प्राप्त संस्थानों में नियमित पूर्णकालिक व्यावसायिक या तकनीकी पाठ्यक्रम को पूरा करने में मदद करने के लिए ₹40.00 लाख (या पाठ्यक्रम शुल्क का 90%, जो भी कम हो) तक का ऋण प्रदान करता है। संवितरण अनुसूची (disbursement schedule) के आधार पर चुकौती अवधि 10-12 वर्ष तक बढ़ सकती है।
एनएसएफडीसी मुख्य रूप से दो मुख्य उद्देश्यों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है: (a) आय-सृजन गतिविधियां: लाभार्थियों को व्यवसाय शुरू करने या उसका विस्तार करने में मदद करने के लिए ऋण प्रदान किए जाते हैं। हालांकि सटीक व्यवसाय आवेदक की जरूरतों के आधार पर भिन्न हो सकता है, एनएसएफडीसी लगभग किसी भी कानूनी और व्यवहार्य आय-सृजन गतिविधि को कवर करता है। समर्थित क्षेत्रों की एक सांकेतिक सूची में शामिल हैं: कृषि और समवर्गी क्षेत्र (जैसे, खेती के उपकरण, डेयरी, पोल्ट्री) लघु उद्योग क्षेत्र (जैसे, विनिर्माण इकाइयां, हस्तशिल्प, बुटीक) सेवा और परिवहन क्षेत्र (जैसे, खुदरा दुकानें, मरम्मत केंद्र, वाणिज्यिक वाहन, ई-रिक्शा) (b) शिक्षा: शिक्षा ऋण योजना (ELS) के माध्यम से, एनएसएफडीसी भारत और विदेश दोनों जगह मान्यता प्राप्त स्नातक या उच्च स्तर के नियमित, पूर्णकालिक व्यावसायिक या तकनीकी पाठ्यक्रमों को आगे बढ़ाने के लिए पात्र छात्रों को ऋण प्रदान करता है।
एनएसएफडीसी ऋण अत्यधिक रियायती ब्याज दरों पर उपलब्ध कराए किए जाते हैं। हालांकि, योजना और चैनलाइजिंग एजेंसी के अनुसार दरें थोड़ी भिन्न हो सकती हैं, लेकिन लाभार्थी आमतौर पर 6.5% से 8% प्रति वर्ष की दर से ब्याज का भुगतान लिया जाता है।
हाँ। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के प्रयास में, एनएसएफडीसी द्वारा निम्नलिखित प्रावधान किए गए हैं: लक्षित आवंटन: मियादी ऋण (Term Loan) और लघु वित्त ऋण (Micro Finance) योजनाओं के अंतर्गत कुल निधि का 40% लक्ष्य विशेष रूप से महिला लाभार्थियों के लिए आवंटित किया जाता है।
पात्र आवेदक निम्नलिखित माध्यमों से अपना आवेदन जमा कर सकते हैं: ऑनलाइन मोड: सुव्यवस्थित डिजिटल प्रोसेसिंग के लिए आधिकारिक PM-SURAJ पोर्टल (pmsuraj.dosje.gov.in) के माध्यम से।
ऑफ़लाइन मोड: अधिकृत राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों (SCAs) या अन्य चैनलाइजिंग एजेंसियों (CAs) के निकटतम जिला या प्रधान कार्यालय में आवश्यक दस्तावेजों (जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण, केवाईसी और अन्य निर्धारित चेकलिस्ट आइटम) के सहित आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है।
नहीं, एनएसएफडीसी सीधे ऋण आवेदनों पर विचार नहीं करता है या सीधे लाभार्थियों को धन वितरित नहीं करता है। एनएसएफडीसी एक "चैनल वित्त प्रणाली" पर काम करता है। अधिकृत "चैनल पार्टनर्स" के माध्यम से लक्षित समूह तक धन पहुंचाया जाता है। वर्तमान में, एनएसएफडीसी चैनल भागीदारों के एक विस्तृत नेटवर्क के माध्यम से अपनी योजनाओं को लागू करता है, जिनमें शामिल हैं:
- राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियां (SCAs)
- सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs)
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs)
- गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - सूक्ष्म वित्त संस्थान (NBFC-MFIs)
- सहकारी बैंक
- लघु वित्त बैंक
(Small Finance Banks) - सहकारी समितियां
- अन्य एजेंसियां और SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक)
एनएसएफडीसी का मुख्य जनादेश वित्तीय सहायता के प्रवाह में सुधार करके अनुसूचित जाति (SC) आबादी के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण और आर्थिक कल्याण को बढ़ावा देना है। इसके प्राथमिक उद्देश्यों और गतिविधियों में शामिल हैं: आय-अर्जक योजनाओं का वित्तपोषण: राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों (SCAs) और अन्य चैनलाइजिंग एजेंसियों (CAs) के माध्यम से व्यवहार्य स्वरोजगार परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना। शिक्षा ऋण प्रदान करना: भारत और विदेश में मान्यता प्राप्त संस्थानों में नियमित, पूर्णकालिक व्यावसायिक या तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने के लिए पात्र छात्रों को राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों और अन्य चैनलाइजिंग एजेंसियों के माध्यम से ऋण प्रदान करना। कौशल विकास का वित्तपोषण: लक्षित समूह की रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रायोजित करने के लिए अनुदान प्रदान करना। बाजार लिंकेज को सुविधाजनक बनाना: लाभार्थियों को उनके उत्पादों का प्रभावी ढंग से विपणन करने में मदद करने के लिए प्रदर्शनियों-सह-मेलों का आयोजन करना और उनमें भाग लेना।
एनएसएफडीसी 102 भागीदारों के नेटवर्क के साथ चैनल फाइनेंस सिस्टम अपनाता है। लक्षित समूह को धन भेजने के लिए, एनएसएफडीसी अधिकृत चैनल भागीदारों की निम्नलिखित श्रेणियों के माध्यम से अपनी योजनाओं को लागू करता है: राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियां (SCAs) सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSBs) क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी - सूक्ष्म वित्त संस्थान (NBFC-MFIs) सहकारी बैंक लघु वित्त बैंक सहकारी समितियां अन्य एजेंसियां और SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक)
एनएसएफडीसी परियोजना लागत के आधार पर विभिन्न अनुकूलित वित्तीय उत्पाद लागू करता है। सभी योजनाओं में, एनएसएफडीसी परियोजना लागत का 90% तक प्रदान करता है। पाँच प्राथमिक योजनाएँ हैं:
- माइक्रो फाइनेंस योजना (MFS): ₹1.40 लाख तक की इकाइयों के लिए छोटी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए सूक्ष्म-ऋण प्रदान करता है। लाभार्थी के लिए 6.5% प्रति वर्ष की ब्याज दर पर अधिकतम ऋण सीमा ₹1.25 लाख है। पुनर्भुगतान 3 वर्षों के भीतर त्रैमासिक किस्तों में होता है (जिसमें 3 महीने की अधिनस्थगन अवधि(Moratorium) शामिल है) यह राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों/अन्य चैनलाइजिंग एजेंसियों के माध्यम से लागू की जाती है।
- आजीविका माइक्रो-फाइनेंस योजना (AMY): ₹1.40 लाख तक की परियोजनाओं के लिए चयनित NBFC-MFIs के माध्यम से तत्काल और आवश्यकता-आधारित माइक्रो-फाइनेंस प्रदान करती है। लाभार्थी के लिए 15% प्रति वर्ष की ब्याज दर पर अधिकतम ऋण ₹1.25 लाख है। 3 साल के भीतर चुकौती (3 महीने की अधिनस्थगन अवधि सहित)।
- मियादी ऋण (Term Loan): ₹1.40 लाख से अधिक और ₹50.00 लाख तक की बड़ी आय-अर्जक परियोजनाओं के लिए डिज़ाइन किया गया है। लाभार्थी के लिए 8% प्रति वर्ष की ब्याज दर पर अधिकतम ऋण सीमा ₹45.00 लाख तक है। 7 साल के भीतर चुकौती (6 महीने की अधिनस्थगन अवधि सहित, जिसे वृक्षारोपण और निर्माण गतिविधियों के लिए 12 महीने तक बढ़ाया जाता है)। राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों/अन्य चैनलाइजिंग एजेंसियों के माध्यम से लागू।
- उद्यम निधि योजना (UNY): छोटी/सूक्ष्म गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए ₹5.00 लाख तक की परियोजनाओं के लिए ऋण प्रदान करती है। अधिकतम ऋण ₹4.50 लाख है। सहकारी समितियों और सहकारी बैंकों के माध्यम से 13% प्रति वर्ष की लाभार्थी ब्याज दर पर, और लघु वित्त बैंकों (SFBs) के माध्यम से 15% प्रति वर्ष की दर पर लागू किया जाता है। 5 साल के भीतर चुकौती (3 महीने की अधिनस्थगन अवधि सहित)।
- शिक्षा ऋण योजना (ELS): पात्र छात्रों को भारत या विदेश में नियमित, पूर्णकालिक व्यावसायिक/तकनीकी मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों (जैसे, इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रबंधन, कानून आदि) या उच्च डॉक्टरेट की पढ़ाई के लिए प्रदान किया जाता है। 6.5% प्रति वर्ष की ब्याज दर पर अधिकतम ऋण ₹40.00 लाख (या पाठ्यक्रम शुल्क का 90%, जो भी कम हो) तक है। चुकौती 10-12 वर्ष तक बढ़ जाती है, जिसमें पाठ्यक्रम की अवधि के साथ 1 वर्ष की अधिनस्थगनअवधि होती है (या जहाँ ऋण वितरित किया गया है और चुकौती शुरू हो गई है वहाँ 6 महीने तक)।
एनएसएफडीसी कारीगरों को प्रमुख मेलों और प्रदर्शनियों (जैसे, भारत अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला, दिल्ली हाट, सूरजकुंड मेला, शिल्प समागम) में भाग लेने में मदद करके बाजार में का अनुभव प्रदान करता है। वे बड़े पैमाने पर कारीगरों और बुनकरों के उत्थान के लिए क्लस्टर विकास कार्यक्रम भी लागू करते हैं।
हाँ। एनएसएफडीसी PM-DAKSH योजना के तहत अनुसूचित जाति (18 से 45 वर्ष की आयु के बीच) के व्यक्तियों के लिए मुफ्त, NSQF-अनुरूप कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रायोजित करता है। नामांकन के लिए उम्मीदवारों हेतु कोई आय मानदंड नहीं है। कार्यक्रम के प्रमुख लाभों में शामिल हैं:
- निशुल्क प्रशिक्षण: चार श्रेणियों (अप-स्किलिंग/री-स्किलिंग, शॉर्ट-टर्म, लॉन्ग-टर्म और उद्यमिता विकास) में पेश किया गया।
- मासिक वजीफा: प्रशिक्षण अवधि के दौरान कुल 80% या उससे अधिक उपस्थिति बनाए रखने के अधीन, प्रशिक्षुओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से ₹1,500/- प्रति माह का वजीफा मिलता है।
- प्रशिक्षण के बाद सहायता:सफल समापन और प्रमाणन पर, प्रशिक्षुओं को अपना स्वयं का उद्यम शुरू करने के लिए एनएसएफडीसी से वित्तीय सहायता तक पहुंच के साथ प्लेसमेंट सहायता या उद्यमशीलता मार्गदर्शन प्राप्त होता है। (नोट: इच्छुक युवा PM-DAKSH पोर्टल (https://pmdaksh.dosje.gov.in) के माध्यम से या "PMDAKSH" मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं)।
एनएसएफडीसी मुख्य रूप से 'स्वास्थ्य और पोषण' के विषय के तहत हाशिए पर रहने वाले और जरूरतमंद व्यक्तियों की मदद करने पर अपने CSR हस्तक्षेपों को केंद्रित करता है। प्रमुख गतिविधियों में सेनेटरी वेंडिंग मशीनें और इंसीनरेटर, प्लास्टिक बोतल क्रशिंग मशीनें, सौर पैनल, जल शोधक (RO प्लांट) और बोरवेल की स्थापना, साथ ही शौचालयों का निर्माण और स्वच्छ भारत अभियान के तहत स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन शामिल है।
हाँ। पार्टनरशिप फर्म और सहकारी समितियां वित्तपोषण के लिए आवेदन करने के पात्र हैं, बशर्ते कि सभी सदस्य अनुसूचित जाति समुदाय के हों और प्रत्येक व्यक्तिगत सदस्य की वार्षिक पारिवारिक आय ₹5.00 लाख की सीमा से अधिक न हो।
दिए गए आंकड़ों के अनुसार, प्राधिकृत अंश पूंजी: ₹1800 करोड़ और प्रदत्त अंश पूंजी (Paid-Up Share Capital): ₹1515 करोड़ है (31 मार्च, 2026 तक)।
धन प्राप्त करने के लिए, राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियोंऔर बैंकों को सख्त मानदंडों को पूरा करना होगा: कोई अतिदेय (No Overdues) नहीं: एनएसएफडीसी को देय कोई अतिदेय नहीं होना चाहिए। उपयोग (Utilization): पहले वितरित धन का न्यूनतम 100% संचयी उपयोग स्तर। गारंटी: राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियों के लिए पर्याप्त राज्य सरकार या बैंक गारंटी उपलब्ध होनी चाहिए। क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) के लिए विशेष रूप से: संवितरण के वर्ष से ठीक पहले के 6 वर्षों में से कम से कम 3 वर्षों में शुद्ध NPA 15% से कम होना चाहिए। संवितरण के वर्ष से ठीक पहले के 6 वित्तीय वर्षों में से कम से कम 3 वर्षों में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को लाभ (शुद्ध लाभ) में होना चाहिए।
NBFC-MFIs के पास एक वर्ष से अधिक समय तक धन का कोई लंबित उपयोग नहीं होना चाहिए और 100% संचयी उपयोग स्तर बनाए रखना चाहिए। उनके पास कोई अतिदेय नहीं होना चाहिए और इस बात पर निर्भर करते हुए विशिष्ट वित्तीय सुरक्षा/गारंटी प्रदान करनी चाहिए कि वे क्लस्टर या नॉन-क्लस्टर मोड के तहत काम करते हैं।